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रानी साहेबा कृष्णकला की तेरहवीं पर रक्तदान शिविर

पंचकूला:  आज (बृहस्पतिवाररामगढ़ राजघराने की दिवंगत रानी साहेबा कृष्णकला  की तेरही क़िला रामगढ़ में अनूठे ढंग से मनाई गयी।  उनका स्वर्गवास  ८८ वर्ष की आयु में शनिवार २७  अक्टूबर को हो गया था इसलिए उनके परिवारजनों परिचितों ने ८८ बोतल रक्त का दान  करके एक नयी परम्परा का आरम्भ किया    बाद में एक शोक सभा में हज़ारों लोगों  ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।उनमे से १०० से अधिक ने शपथ ली कि वे रानी कृष्णकला  की ही तरह अपनी आँखें दान करेंगे ताकि नेत्रहीन व्यक्तियों को  देख पाने का अवसर मिलेवे रामगढ़ रियासत के प्रमुख कँवर मोहन सिंह जी की धर्मपत्नी थीं।  उन के पिताहारोल साहेब नर्मदा प्रसाद सिंह (बैकुंठपर), पंडित जवाहरलाल नेहरु के अंतरंग मित्र थे जिनका ज़िक्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ने अपनी पुस्तक “डिस्कव्रीऑफ़ इंडिया” में किया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया  अपनी धर्मपत्नी सहित कई बार जेल गए। नेहरु जी  हारोल साहेब जेल में भी साथ साथ थे। रानी साहेबा भी बचपन में अपनी माता के साथ कारावास में रहीं।  

   कॉलेज के समय उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री महादेवी वर्मा से शिक्षा ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। रानी साहेबा एक अच्छी खिलाड़ी भी थीं।वे एक धर्मपरायण महिला थीं जिन्होंने अपनी शादी की साठवीं सालगिरह  ग़रीबलड़कियों के विवाह शाही ठाठ बाठ से  आयोजित करके मनाई थी।