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पीएम मोदी ने इसलिए शुरू की थी मन की बात, इन मुद्दों पर देश को किया जागरुक

25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 50वीं बार देशवासियों से अपने मन की बात करेंगे। इस रेडियो कार्यक्रम के जरिए वह देश के हर नागरिक के साथ जुड़ना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने टीवी या अन्य माध्यम की बजाए रेडियो को चुना है क्योंकि रेडियो भारत के दूरदराज के गांवों में भी आसानी से होते हैं। पीएम इसके जरिए अपनी भावनाओं को देश के लोगों तक पहुंचाते हैं। उनका यह कार्यक्रम हर महीने के आखिरी रविवार को ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन से प्रसारित होता है। इसी कार्यक्रम को शाम में विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद करके प्रसारित किया जाता है। इन भाषाओं में संस्कृत से लेकर उड़िया तक शामिल हैं। पीएम बनने के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके पहले एपिसोड का प्रसारण 3 अक्तूबर, 2014 को हुआ था। जिसके बाद से यह निरंतर जारी है।हर महीने के आखिर में पीएम मोदी जनता को मन की बात कार्यक्रम के जरिए संबोधित करते हैं। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होगा कि आखिर इस कार्यक्रम की शुरुआत क्यों की।

दरअसल, पीएम मोदी के इस रेडियो कार्यक्रम का मकसद आम नागरिक से नियमित अंतराल पर जुड़ना है। इसके अलावा लोगों को सरकार की योजनाओं से अवगत कराना और राष्ट्र निर्माण और शासन में आम आदमी का समर्थन पाना भी उनका उद्देश्य है। यह कार्यक्रम श्रोताओं को सीधे पीएम से सवाल पूछने का मौका देता है। इसके साथ ही श्रोता पीएम का ध्यान उन क्षेत्रों के बारे में खींच सकते हैं जिसका असर आम आदमी पर पड़ता है। श्रोता पीएम को बता सकते हैं कि वह अपनी मन की बात में किन-किन विषयों पर बात कर सकते हैं। गांधी जयंती के अगले दिन पीएम ने अपनी मन की बात की शुरुआत की थी।पीएम मोदी अब तक 49 बार मन की बात कर चुके हैं और आज यानी 25 नवंबर को वह 50वीं बार देशवासियों को संबोधित करेंगे। मन की बात के सफर में अब तक उन्होंने राष्ट्र से जुड़े किन-किन प्रमुख मुद्दों पर बात की उसके बारे में हम आपको बताते हैं।

राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में पीएम मोदी ने खादी और भारत सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना स्वच्छ भारत अभियान को लेकर बात की थी। उन्होंने श्रोताओं से कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने के लिए कहा था ताकि इससे गरीब बुनकरों को फायदा मिले। पीएम के इस अनुरोध के बाद खादी की बिक्री 120 प्रतिशत बढ़ गई थी। पीएम ने यह भी बताया था कि कैसे हमें अपने क्षेत्र, शहर और देश को स्वच्छ बनाने के लिए खुद भी जागरुक होना पड़ेगा और देशवासियों को भी जागरुक करना होगा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि हमें महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक देश को स्वच्छ बनाना है।

 

ड्रग मुक्त भारत, अंतरराष्ट्रीय योग दिवसपीएम मोदी का ध्यान ड्रग्स की तरफ एक श्रोता अभिषेक पारीख ने दिलाया था। उसने पीएम से इसपर बात करने के लिए कहा था जिसके बाद उन्होंने पूरे दिसंबर 2014 के पूरे महीने को इस समस्या से निपटने के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों को ड्रग मुक्त भारत हैशटेग का इस्तेमाल करके एक ऑनलाइन मूवमेंट शुरू करने और लोगों को जागरुक करने के लिए कहा था। ड्रग को लेकर पीएम ने कहा था कि नशे की लत बुरी है, बालक बुरा नहीं है। जब कोई लक्ष्य न हो तब जीवन में ड्रग्स का प्रवेश हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस- अपने इसी संबोधन में पीएम मोदी ने बताया था कि भारत के योग प्रस्ताव का 177 देशों का को-स्पांसर बनना वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देशवासियों को खुशखबरी देते हुए बताया था कि संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने के लिए स्वीकृति दे दी है। इसके बाद अगले साल से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत हो गई थी।अपने रेडियो कार्यक्रम में पीएम मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को देशभर में एक अभियान बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बेटियों को पढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि जब एक बेटी पढ़ती है तो पूरा घर शिक्षित होता है। उन्होंने मां के गर्भ में बेटियों की होने वाली भ्रूण हत्या को रोकने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि बेटे और बेटियों के बीच भेदभाव को खत्म करना होगा। भ्रूण हत्या को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा था कि हम न केवल मौजूदा पीढ़ी को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी भयानक संकट को आमंत्रित कर रहे हैं।परीक्षा के दिनों में बच्चे अक्सर तनावग्रस्त हो जाते हैं। खासतौर पर बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं।

इस परेशानी की गहराई को समझते हुए पीएम मोदी ने इसे अपनी मन की बात में शुमार किया था। छात्रों से पीएम ने कहा था कि परीक्षा अपनी क्षमता पहचानने का एक तरीका है, लिहाजा छात्रों को अपनी ताकत पहचाननी चाहिए। स्कूलों को सुझाव देते हुए उन्होंने साल में दो बार परीक्षा उत्सव आयोजित करके इसका हौवा दूर करने के लिए कहा था। छात्रों के माता-पिता से उन्होंने कहा था कि वह उनके मन में परीक्षा का हौवा न पैदा होने दे इसके लिए हर रोज परीक्षा से आने के बाद छात्रों से यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि पेपर कैसा गया? दुनियाभर के लोग जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रहे हैं। इस मुद्दे को भी पीएम मोदी ने अपनी मन की बात में शामिल करते हुए लोगों को कई नसीहतें दी थीं। किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने पर चिंता जाहिर करते हुए पीएम ने कहा था कि फसल के अवशेष भी बहुत कीमती होते हैं। वे अपने आप में एक जैविक खाद होती है लेकिन हम उसको बर्बाद करते हैं। फसल के अवशेष जलाने से जमीन के ऊपर की परत जल जाती है, जो हमारी उर्वरा भूमि को मृत्यु की ओर धकेल देती है। किसानों को जागरुक करने के लिए उन्होंने कहा था कि किसानों को प्रशिक्षित करना पड़ेगा, सत्य समझाना पड़ेगा कि फसल अवशेष जलाने से हो सकता है समय, मेहनत बचती होगी, लेकिन ये सच्चाई नहीं है। फसल के अवशेष को फिर से एक बार जमीन में दबा दिया जाये तो वो खाद बन जाता है।