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मां का इलाज खुद करवाना पड़ता हैं, कोई ओर नहीं करवाता-नरेन्द्र आहूजा विवेक 

मेरी माँ भारती के राष्ट्र रूपी शरीर के भाल सिर मस्तिष्क में अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए से उत्पन्न ब्लोक के कारण विकास की धारा अवरुद्ध हो गई थी। एक ऐतिहासिक भूल के कारण बनी इन अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए से अवरुद्ध मेरी मातृ भूमि के शरीर के भाल को कमज़ोर कर दिया। मेरी मातृभूमि के इस विकास में पिछड़े कमज़ोर हुए हिस्से के कारण मौका मिलते ही पड़ौसी पाक के नापाक आतंकी और मेरे देश के भीतर के अलगाववादी इस अनुच्छेद 370 का दुरुपयोग करके बार बार आतंकी हमले किए और मेरी माँ के भाल सिर पर चोट पहुंचाने का काम किया। हद तो तब हो गई जब अपने स्वार्थ के लिए इन बाहरी आतंकियों और भीतरी अलगाववादियों ने मां भारती के पुत्रों को उनकी ही माँ के आंचल उनकी भूमि छोड़ कर जाने पर विवश कर दिया। माँ के अपने पुत्रों कश्मीरी पंडितों से वियोग की व्यथा कथा हम सबको विदित है। उस कष्ट की पराकाष्ठा में भी किसी को उसके निदान का कोई ध्यान नहीं आया। इस दारुण दर्द पर किसी ने भी आह नहीं भरी। माँ भारती के इस दुख को उस समय भी कुछ राष्ट्रभगतों ने सुना समझा और अपनी मां मातृ भूमि के कष्ट की आवाज़ बने। लेकिन सत्ता के पद के मद में चूर ज़िम्मेदार लोगों के कानों में सत्ता विलास के नगाड़े बज रहे थे। उस नक्कारखाने में इनकी विरोध की तूती की आवाज़ कौन सुनता। जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को ही अनदेखा अनसुना कर दिया गया तो इस व्यथा कथा को सत्ता की कुर्सियों पर बैठे और विकास के नाम पर अपना विकास और जनता का विनाश करते लोग कैसे सुनते। इसे अपनी नियति मान कर बिना सुरक्षा हेलमेट पहने रोज़ाना सेना की बेइज्जती करवाते देखते रहे।
आखिर प्रताड़ना की पराकाष्ठा पर देश ने निर्णय लिया और अपनी सभी बीमारियों के इलाज के लिए एक कुशल अनुभवी चिकित्सक के रूप में मोदी और शाह जी को देश की सत्ता आम चुनावों में भारी बहुमत देते हुए सौप दी। अब इसका इलाज करने का जनमत पा कर मोदी शाह की जोड़ी ने जब पहले तो सुरक्षा हेलमेट सेना भेज कर बोफोर्स तोपों की तैनाती सीमा पर करते हुए दो तीन बार जमीन और वायु सीमा के पार जाकर दुश्मनों के भीतर घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक से बाहरी शत्रुओं को कमज़ोर किया तो वह त्राहि त्राहि माम करते हुए पूरे विश्व मे मध्यस्थता की करुण गुहार लगाने लगे। बाहरी शत्रुओं का ईलाज अपनी कूटनीति दवाऔर सर्जिकल स्ट्राईक के ऑपरेशनों से करने के उपरांत अब भीतर से सर्जरी और इलाज की जरूरत थी और माँ भारती और उनके पुत्र बार बार गुहार लगा रहे थे। मोदी शाह की एनेस्थीसिया और सर्जन की जुगल जोड़ी ने अपने समस्त सहायकों शुभचिंतक साथियों के साथ मिलकर इन अवरोधक अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए को हटा कर विकास की गंगा को हिमालय के इस प्रदेश में बहने के लिए खोल दिया तो राष्ट्रभगतों में आनन्द खुशी की लहर दौड़ गई और आतंकी अलगाववादी में मातम पसर गया वह चिल्लाने लगे यह विकास तो केवल उनके कुछ परिवारों की बपौती था यह सबको कैसे मिल सकता है। केवल अपने विलास विकास का पक्का इंतज़ाम उन्होंने आज़ादी के समय ही कर लिया था। उस समय आज़ादी तो आई थी पर सत्ता धीशों ने उसे अपने महलों में कैद कर लिया था और आम जन मां भारती के पुत्रों को उस आज़ादी और विकास से वंचित रख कर उनके अधिकारों पर डकैती मार ली गई। आज जब सफल ऑपरेशन के बाद आज़ादी का उल्लास विकास उजाला सभी आतंक अलगाव के अंधेरों को चीरता आम जन तक पहुंच रहा है तो अपना एकाधिकार टूटता देख यह आतंकी इनके आका चिल्ला रहे हैं। यह मामला तो यू एन या अमेरिका ने इलाज करना था आप इस अंतरराष्ट्रीय समस्या का हल खुद कैसे कर सकते हैं। अब इन्हें ईश्वर सद्बुद्धि दें कि मेरी अपनी माता का इलाज तो मैंने खुद ही करना है मेरी माता की सेवा मैं खुद नहीं करूंगा तो कोई बाहर वाला क्यों करेगा।
नरेन्द्र आहूजा विवेक
प्रधान वेद प्रचार समिति