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विद्यालय से रहो गुल वेतन पाओ फुल* प्राथमिक विद्यालय हलोर का मामला

*विद्यालय से रहो गुल वेतन पाओ फुल*
प्राथमिक विद्यालय

महराजगंज

जी हाँ विकास खण्ड क्षेत्र के हलोर प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाचार्य राजन की भूमिका किसी राजा से कम नही है आलम यह है कि कभी विद्यालय नही आते है परन्तु उनकी उपस्थिति व वेतन बराबर उनके खाते में जा रही है। प्रधानाचार्य के इस खेल में इंचार्ज प्रधानाध्यापक आराधना बाजपेयी उनका भरपूर सहयोग ही नही अपितु काले कारनामो पर पर्दा डालने का काम कर रही हैं।
बताते चलें कि प्राथमिक विद्यालय हलोर के प्रधानाचार्य राजन कभी विद्यालय ही नही आते लेकिन उनकी उपस्थिति बराबर दर्ज कर उनका वेतन निकाला जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा की गयी शिकायत पर जब मीडिया हकीकत जानने पहुंची तो पाया कि प्रधानाचार्य राजन विद्यालय में नही हैं वहीं जब इस बावत इंचार्ज प्रधानाध्यापक आराधना बाजपेयी ने बताया कि रोज विद्यालय आते हैं आज भी आये थे लेकिन कुछ काम से उन्हे जाना पड़ा। आवागमन रजिस्टर दिखाने की बात पर उन्होने मीडिया को उनकी सीमाएं बताने लगी यही नही उन्होने ने प्रधानाध्यापक के आने न आने के विषय में बयान देने से भी इंकार कर दिया। वहीं जब विद्यालय के बच्चों से बात की गयी तो उन्होने बताया कि प्रधानाध्यापक जब भी आते हैं तुरन्त चले जाते हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सन्त कुमार चैधरी की मानें तो प्रधानाध्यापक राजन के विद्यालय न आने की शिकायत खण्ड शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व जिलाधिकारी से भी काफी पहले ही कर चुके हैं लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नही हो सकी वहीं गांव के अभिभावक दुर्गा शंकर शुक्ल ने बताया कि उन्होने आज तक प्रधानाध्यापक को नही देखा है और इसकी शिकायत भी की है परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है। विद्यालय गेट के सामने ही निवास करने वाले व्यापार मण्डल अध्यक्ष प्रदीप पटेल ने भी बताया कि आज तक उन्होने प्रधानाध्यापक राजन को नही देखा है। पूर्व प्रधान अमर सिंह ने भी राजन के विद्यालय न आने की पुष्टि करते हुए कहा कि आज तक हमने भी उन्हे नही देखा है। मामले में खण्ड शिक्षा अधिकारी डाॅ सुरेष कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है जांच करायी जायेगी यदि ऐसा है तो कार्यवाही निश्चित है।

मध्यान्ह भोजन भी चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट
इनसेटः- प्राथमिक विद्यालय हलोर में जहां प्रधानाचार्य राजन ने रामराज स्थापित कर रहा है वहीं सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मिड-डे-मील भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी हुई है। मीडियाकर्मी जब विद्यालय पहुंचे तो बच्चों को भोजन परोसा जा रहा था रसोई घर में गन्दगी फैली हुई थी जिससे खाने पर मक्खियां भिन भिना रही थी वहीं विद्यालय में बेतरतीब बैठे बच्चों के आस पास भी काफी गन्दगी देखने को मिली। इसके अलावां जब खाने पर नजर डाली गयी तो वह भी गुणवत्तायुक्त नही थी।