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इस बार हरियाणा चुनाव बेरोज़गारी के मुद्दे पर केन्द्रित हो: योगेन्द्र यादव

• सीएमआईई के मई-अगस्त की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में बेरोज़गारों की संख्या 20 लाख पार
• पंजाब, झारखंड, मध्यप्रदेश, तमिल नाडु जैसे बड़े राज्यों से भी ज़्यादा संख्या में बेरोज़गार हरियाणा में 
• आरटीआई से मिली उस जानकारी की पुष्टि जिसमें 15 लाख बेरोज़गार बताए गए थे और सरकार ने झुठला दिया था 
• चुनाव में तू तू मैं मैं या खरीद फरोख्त की बजाए बेरोजगारी पर सार्थक बहस हो, सरकार जवाब दे, बाकी पार्टियां विकल्प दें: योगेन्द्र यादव की पेशकश
हरियाणा में विधानसभा चुनाव घोषित होते ही स्वराज इंडिया ने प्रदेश की सभी पार्टियों के सामने प्रस्ताव रखा है कि इस बार चुनाव को मुद्दा विहीन होने से बचाया जाए। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह अपील की कि इस चुनाव में तू तू मैं मैं या फिर नेताओं की खरीद-फरोख्त को छोड़कर प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या यानी बेरोजगारी पर एक सार्थक बहस हो। उन्होंने बेरोजगारी के बारे में कुछ चौंकाने वाले नए तथ्य पेश करते हुए कहा कि इस चुनाव में सरकार बेरोजगारी के मोर्चे पर जनता को जवाब दे और बाकी पार्टियां प्रदेश में बेरोजगारी को समाप्त करने के लिए वैकल्पिक योजना पेश करें। उन्होंने अपनी ओर से घोषणा की कि स्वराज इंडिया कुछ ही दिनों में प्रदेश में पूर्ण रोजगार की एक पुख्ता वैकल्पिक योजना पेश करेगा।
सीएमआईई के नए आंकड़ों (मई से अगस्त 2019 की चौमाही रपट) के हवाले से योगेंद्र यादव ने खुलासा किया कि प्रदेश में बेरोज़गारों की संख्या 20 लाख को भी पार कर गयी है। अपने से ज़्यादा आबादी वाले कई प्रदेशों को पछाड़ते हुए हरियाणा ने बेरोज़गारी को आपदा का रूप दे दिया है। इस ताजा रिपोर्ट से मिले आंकड़ें बताते हैं कि हरियाणा से ज़्यादा आबादी वाले पंजाब, मध्यप्रदेश, तमिल नाडु और झारखंड जैसे राज्यों में भी कुल बेरोज़गारों की संख्या हरियाणा से कम है। उदाहरण के लिए जहाँ पंजाब में 11 लाख 24 हज़ार बेरोज़गार हैं वहीं इससे कम आबादी वाले हरियाणा में बेरोज़गारों की संख्या 20 लाख 20 हज़ार है। इस रपट के मुताबिक हरियाणा के इन बेरोजगारों में 4.5 लाख तो ग्रेजुएट या इससे अधिक शिक्षित थे।
चिंता की बात है कि हरियाणा से तीन गुणा आबादी वाले मध्यप्रदेश और तमिलनाडु में बेरोज़गारों की संख्या 12 लाख से कम है। इसके अलावा हरियाणा से अधिक आबादी वाले एक और राज्य झारखंड में लगभग 13 लाख बेरोज़गार हैं। आज से ठीक तीन साल पहले अगस्त 2016 में बेरोजगारी की दर में हरियाणा देश में सातवीं पायदान पर था, लेकिन अगस्त 2019 के अंत तक हरियाणा पहली पायदान पर पहुंच चुका था, यानी किसी भी प्रदेश में हरियाणा जितनी 28.7% बेरोजगारी नहीं है।
ताज़ा आंकड़ों के आधार पर खट्टर सरकार को घेरते हुए स्वराज इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गोदारा ने कहा कि जब आरटीआई से जानकारी मिली थी कि प्रदेश के 15 जिलों में ही कुल 15 लाख से ज़्यादा बेरोज़गार हैं तो खट्टर सरकार के मंत्री ने विधानसभा में खड़े होकर अपने ही इन आंकड़ों को झुठला दिया था। आज 20 लाख 20 हज़ार बेरोज़गारों की जानकारी मिलते ही यह स्पष्ट हो गया कि आरटीआई की वह सूचना भी सही थी जिसको देने वाले अधिकारियों पर सरकार ने कार्रवाई की थी।
पार्टी उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने कहा कि बेरोजगारी की सच्चाई आज और अगले दो दिन तक पूरे हरियाणा में दिखाई दे रही है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित क्लर्क भर्ती में केवल 4858 नौकरियों के लिए हरियाणा में क़रीब 15 लाख आवेदक परीक्षा दे रहे हैं। हैरत की बात है कि एक तरफ जहाँ बेरोज़गारी में हरियाणा देश का नंबर 1 राज्य बन गया है वहीं प्रदेश को अंधकार में धकेलने वाली खट्टर सरकार रोज़गार के नाम पर आशीर्वाद मांगने निकली थी। स्वराज इंडिया ने बेरोज़गारी को आज प्रदेश का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है जिसका खट्टर सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं। बीस दिन पहले तक जिन विपक्षी पार्टियों को होश भी नहीं था कि हरियाणा में बेरोज़गारी जैसी कोई समस्या है वो भी अब स्वराज इंडिया के नक्शेकदम का अनुसरण करने की कोशिश करने लगे हैं।
पार्टी के प्रदेश महासचिव दीपक लांबा ने कहा कि इन्हीं कारणों से स्वराज इंडिया ने हरियाणा में “मैं भी बेरोज़गार” अभियान चलाया है जिसके तहत पार्टी के कार्यकर्ता गांव गांव जा रहे हैं। स्वराज इंडिया अगले कुछ दिनों में प्रदेश की जनता के समक्ष पूर्ण रोजगार हासिल करने की एक विस्तृत और सकारात्मक योजना प्रस्तुत करेगी। हरियाणा को बेरोज़गारी के गर्त में धकेलने वाली सरकार को अगले विधानसभा चुनाव में प्रदेश के युवा मजबूती से जवाब देंगे।