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युवावस्था में कल्याण का मार्ग पकड़ लेना चाहिए-कीर्ति किशोरी जी

पंचकूला। श्री सनातन धर्म मंदिर सभा सेक्टर 10 पंचकूला में वार्षिक मूर्ति स्थापना समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास विदुषी कीर्ति किशोरी जी ने प्रहलाद जी का प्रसंग सुनाया। मंदिर सभा के प्रधान मामचंद, महासचिव एसपी विज, संरक्षक मुंशी राम अरोड़ा, वरिष्ठ उपप्रधान भारत हितैषी और पैटर्न एसके शर्मा ने कीर्ति किशोरी जी को पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। प्रह्लाद जी का चरित्र सुनाते हुए किशोरी जी ने कहा कि कितने कष्ट प्रहलाद जी ने उठाए, फिर भी हरि का नाम नहीं छोड़ा। भगवान ने प्रहलाद की रक्षा की। उन्होंने कहा कि भारत देव भूमि है। यहां किसी भी मानव का जन्म अपना कल्याण कर लेने यानी जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा पाने के लिए होता है। लेकिन, माया के वश में आकर हम सब अपना मूल कार्य को भूल कर संसारिक भोग-विलासादि में फंस जाते हैं। जिसके कारण परेशानी होती है। कीर्ति किशोरी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत में प्रह्लाद व ध्रुव का चरित्र युवाओं को अपनाने के लिए एक अदभूत प्रकरण है। प्रह्लाद जी ने अपने साथियों से कहा कि युवावस्था में ही अपना कल्याण का मार्ग पकड़ लेना चाहिए।
इस अवसर पर सनातन धर्म मंदिर सभा सेक्टर 10 पंचकूला के प्रधान मामचंद मुख्य संरक्षक बाऊ दलजीत सिंह, संरक्षक मुंशी राम अरोड़ा, एसके शर्मा, एसएस सैनी, आरएल सेतिया, महासचिव एस पी विज, वरिष्ठ उपप्रधान भारत हितैषी, जेआर सिंगला, सुभाष शर्मा, धर्मशाला इंचार्ज प्रेम लाल गुप्ता, कोषाध्यक्ष विशाल शर्मा, सह कोषाध्यक्ष जी डी बत्रा, पैटर्न जीडी गौतम, पूर्व महासचिव राजकुमार शर्मा, महिला मंडल प्रधान प्रवीण प्रवेश, आभा गुप्ता, सत्या गौतम, रघुवीरी, आशा, संतोष, वनीता भी उपस्थित थीं। कीर्ति किशोरी ने लोगों को प्रवचन सुनाते हुए बताया कि भगवान की भक्ति बचपन से ही करनी चाहिए, जिन लोगों का कथन है कि अभी तो कमाने खाने की उम्र है, वह कथन गलत है। क्योंकि वृद्धावस्था में तो हम बिना सहारे के ही चल नहीं सकते, ना देख सकते हैं और ना ही सुनाई पड़ता है। फिर भगवान की भक्ति कैसे करेंगे। कीर्ति किशोरी जी ने कहा कि देखिए ध्रुव जी ने मां के कहने पर भगवान की गोद प्राप्त की। उन्होंने मृत्यु पर विजय प्राप्त की। इसलिये साधना करो, मन से भक्ति करो, मन से दृढ़ता से पक्के होकर फिर चाहे जमाना कुछ भी कहे, दीवाना कहे या पागल कहे, हमें तो उनका होना है, प्रभु का होना है। संतों ने कहा है कि भाई संसार में रहकर भक्ति कर सकते हैं।